श्री करन नरेन्द्र कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर (SKNCOA), जोबनेर: राजस्थान की कृषि शिक्षा का प्रथम गढ़
श्री करन नरेन्द्र कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर (SKNCOA), जोबनेर: राजस्थान की कृषि शिक्षा का प्रथम गढ़
राजस्थान के जोबनेर (Jo-ba-ner) कस्बे में स्थित श्री करन नरेन्द्र कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर (SKNCOA) न केवल राज्य बल्कि पूरे देश में कृषि शिक्षा का एक ऐतिहासिक और अग्रणी संस्थान है। इसे राजस्थान में कृषि शिक्षा का पहला समर्पित संस्थान माना जाता है।
स्थापना और नामकरण
इस संस्थान की जड़ें 1893 में पड़ीं, जब ठाकर करन सिंह ने स्वामी दयानंद सरस्वती की प्रेरणा से यहाँ एंग्लो-वैदिक हाई स्कूल की स्थापना की।
बाद में उनके पुत्र रावल नरेन्द्र सिंह ने जुलाई 1947 में इस विद्यालय को कृषि महाविद्यालय में उन्नत किया और इसे अपने पिता-पुत्र की स्मृति में “श्री करन नरेन्द्र (SKN)” नाम दिया।
यही से राजस्थान में कृषि शिक्षा का आधुनिक दौर आरम्भ हुआ।
विकास की समयरेखा
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1893: एंग्लो-वैदिक हाई स्कूल की स्थापना।
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1947: रावल नरेन्द्र सिंह द्वारा SKN कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर की औपचारिक स्थापना।
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1951: प्रथम कृषि स्नातक बैच उत्तीर्ण।
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1955: कॉलेज का राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहण।
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1962: राजस्थान एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी का घटक कॉलेज बना।
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1964–1967: स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू, विभागीय इमारतें, हॉस्टल व टेलीफोन एक्सचेंज जैसी सुविधाएँ विकसित।
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1970–1978: सड़क, स्टेडियम, मृदा-संरक्षण क्षेत्र, पुस्तकालय व हॉस्टल का विस्तार; संस्थापक की प्रतिमा का अनावरण।
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1981–1993: NARP एवं क्षेत्रीय शोध की शुरुआत, नए विभाग, कंप्यूटर सुविधाएँ; B.Sc.(Ag) में JET प्रवेश प्रणाली लागू।
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1997: बायोकेमिस्ट्री भवन की स्थापना; एंटोमोलॉजी, एग्रोनॉमी, हॉर्टिकल्चर और प्लांट फिजियोलॉजी में Ph.D. की स्वीकृति।
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2013: कॉलेज से विश्वविद्यालय स्तर तक उन्नयन, Sri Karan Narendra Agriculture University (SKNAU), जोबनेर की स्थापना।
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2016: प्लांट ब्रीडिंग व जेनेटिक्स विभाग में टिशू कल्चर लैब (RKVY फंड से); गिर गाय परियोजना की शुरुआत।
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2019: SKN Agri-Business Incubator का शुभारंभ, एग्री-उद्यमिता को बढ़ावा।
अकादमिक संरचना और कार्यक्रम
आज SKN कॉलेज/विश्वविद्यालय में:
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B.Sc. (Ag) Hons
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11 विषयों में M.Sc. (Ag)
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8 विषयों में Ph.D.
कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। लगभग 15 विभागों के साथ यह एक सशक्त शिक्षण एवं शोध ढांचा उपलब्ध कराता है। फैकल्टी और गैर-शिक्षकीय स्टाफ के संतुलित अनुपात से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित होती है।
शोध, नवाचार और प्रभाव
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अब तक 60 से अधिक उच्च उत्पादक फसल किस्मों का विकास।
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16+ AICRP केंद्र और 8 जिलों का भौगोलिक अधिकार क्षेत्र, जो तीन एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में फैला है।
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शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए फसल प्रबंधन, जल-संरक्षण, बीज मसाले, अनाज-दलहन और तिलहन पर अनुप्रयुक्त शोध।
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किसानों के लिए नियमित प्रशिक्षण और एक्सटेंशन गतिविधियाँ, जिससे कृषि तकनीक सीधे गाँवों तक पहुँची।
परिसर, सुविधाएँ और परंपरा
जोबनेर परिसर में:
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प्रयोगात्मक खेत,
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आधुनिक प्रयोगशालाएँ,
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विस्तृत पुस्तकालय,
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छात्रावास,
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खेल परिसर और
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“सारस्वती भवन” ऑडिटोरियम
जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
संस्थान ने समय के साथ JET/Pre-PG प्रवेश सुधार, कैरियर और उद्यमिता समर्थन तथा समुदाय-केंद्रित एक्सटेंशन को अपनाते हुए अपनी परंपरा को आगे बढ़ाया है। संस्थापक रावल नरेन्द्र सिंह की विरासत आज भी कॉलेज की आत्मा में जीवित है।
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